rheumatoid arthritis disease

रुमेटिक आर्थराइटिस रोग : - रुमेटिक आर्थराइटिस एक अत्यंत कष्ट प्रदान करने वाली गंभीर रोग है,जो हाथ एवं पैरों के जोड़ों में होता है। मानव शरीर में रोगों से लड़ने की शक्ति भलीभांति प्रकार से कार्य नहीं करती है और प्रतिरक्षा प्रणाली ही शरीर के ऊतकों पर आक्रमण करने लगती है। वास्तव में रुमेटिक आर्थराइटिस एक दीर्घकालिक गड़बड़ी है जो शरीर की रोगों से रक्षा करने वाली प्रणाली ही अपने शरीर के खिलाफ कार्य करने लगती है। परिणामस्वरूप हड्डियों में विकृति आ जाती है एवं दिन - प्रतिदिन स्थिति दर्दनाक एवं बदतर होती चली जाती है। इसे वाट रक्त दोष भी कहा जाता है। 

लक्षण :- हाथ एवं पैरों के जोड़ों में दर्द,सूजन,जोड़ों में अकड़न,शरीर के अन्य भागों में भी सूजन,जोड़ों को छूने में कष्ट,थकान,ऊर्जा में कमी,भूख न लगना,बुखार,चकत्ते होना,चलने - फिरने में परेशानी,जोड़ों को मोड़ने में दर्द होना,गर्दन में दर्द,खून की कमी,साँस लेने में भी परेशानी,आँखें कमजोर होना,त्वचा के निकट गांठें आदि रुमेटिक आर्थराइटिस रोग के प्रमुख लक्षण हैं। 

कारण :- रोग प्रतिरोधक क्षमता का कमजोर हो जाना,जोड़ों में यूरिक एसिड का जमा होना,आनुवांशिक कारण,वातावरणीय कारक,इंफेक्शन,शरीर में कैल्सियम की कमी,दवाओं का दुष्प्रभाव,दैनिक रहन - सहन में आलसीपन आदि रुमेटिक आर्थराइटिस रोग के मुख्य कारण हैं। 

उपचार :- (1) नियमित रूप से पौष्टिक खाद्य पदार्थों ( कैल्सियम,प्रोटीन आदि ) के सेवन से रुमेटिक आर्थराइटिस रोग से बचा जा सकता है। 

(2) नियमित रूप से व्यायाम,योग एवं प्राणायाम करने से रुमेटिक आर्थराइटिस रोग से निजात मिल जाती है। 

(3) पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से भी रुमेटिक आर्थराइटिस रोग से बचा जा सकता है। 

(4) वजन को काम या नियंत्रित करके भी रुमेटिक आर्थराइटिस रोग से बचा जा सकता है। 

(5) फ़ास्ट फ़ूड एवं तली - भुनी खाद्य पदार्थों के सेवन से परहेज द्वारा भी रुमेटिक आर्थराइटिस रोग से मुक्त रह सकते हैं। 

(6) एरंड के तेल को गुनगुना करके मालिश करने से रुमेटिक आर्थराइटिस रोग में बहुत आराम मिलता है। 

(7) सोंठ,अजवाइन,मीठी सुरंजन,मेथी,अश्वगंधा,सभी को समान भाग लेकर चूर्ण बनाकर सुबह - शाम गुनगुने दूध या पानी के साथ सेवन करने से रुमेटिक आर्थराइटिस रोग ठीक हो जाता है। 

(8) हरसिंगार के पांच - छह पत्तों को पीसकर एक गिलास जल में उबालें और जब चौथाई शेष बचे तो ठंडा करके सुबह  शाम सेवन करने से रुमेटिक आर्थराइटिस कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। 

(9) जैतून के तेल की मालिश से रुमेटिक आर्थराइटिस रोग ठीक हो जाता है। 

(10) ब्लैक बेरी और चेरी के जूस का प्रतिदिन सेवन करने से रुमेटिक आर्थराइटिस रोग दूर हो जाता है। 

(11) पपीते के फल का सेवन करने से भी रुमेटिक आर्थराइटिस रोग में बहुत आराम होता है। 

(12) अनानास के सेवन से भी रुमेटिक आर्थराइटिस रोग में बहुत फायदा होता है। 

(13) गाजर एवं चुकुन्दर का जूस प्रतिदिन पीने से रुमेटिक आर्थराइटिस रोग दूर हो जाता है। 

(14 दूध में हल्दी मिलाकर पीने से भी रुमेटिक आर्थराइटिस रोग में बहुत आराम मिलता है। 

(15) लहसुन की चार - पांच कलियों के प्रतिदिन सेवन से रुमेटिक आर्थराइटिस रोग में बहुत फायदा होता है। 

आसान एवं प्राणायाम : - अनुलोम - विलोम,भस्त्रिका,कपालभाति,भ्रामरी,उदगीथ,उज्जयी,सूक्ष्म व्यायाम उत्तानपादासन आदि आसनों  को  नियमित करने से रुमेटिक आर्थराइटिस रोग में अद्भुत लाभ होता है। 


osteoporosis disease

अस्थिसुषिरता या ऑस्टियोपोरोसिस रोग :- अस्थिसुषिरता हड्डी का एक अत्यंत गंभीर रोग है,जिसमें अस्थि में स्थित खनिज का घनत्व कम हो जाने के कारण  अस्थि के टूटने या भंगुरता का जोखिम बढ़ जाता है।खासकर महिलाओं में रजोनिवृत्ति के उपरांत अस्थिसुषिरता या ऑस्टियोपोरोसिस सबसे ज्यादा पाया जाता है।वैसे यह पुरुषों में भी पाया जाता है;किन्तु महिलाओं के अपेक्षा बहुत कम पाया जाता है।मानव शरीर लगातार हड्डी के ऊतकों का अवशोषण करता है और उसे बदलती रहती है;किन्तु जब नई हड्डी उतनी जल्दी से नहीं बनती,जितनी जल्दी से पुरानी हड्डी नष्ट होती है।ऐसी स्थिति में हड्डियाँ कमजोर और नाजुक हो जाती है।इसे ही अस्थिसुषिरता या ऑस्टियोपोरोसिस कहा जाता है।इसमें हड्डियों में भंगुरता जैसे लक्षण आ जाते हैं।वास्तव में जीवन शैली में बदलाव एवं शारीरिक कसरत - व्यायाम न करना भी इसका विशेष कारण है।

लक्षण :- मेरुदंड में विकार,पीठ दर्द,तंत्रिका मूल दर्द,रुक - रुककर होने वाली पीड़ा,नजरें दुर्बल हो जाना,संतुलन विकार,बेहोशी आना,खड़े होने पर रक्तदाब कम हो जाना,अनियमित धड़कन,कमजोरी और थकान,स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाना,अवसाद,मन में घबराहट आदि अस्थिसुषिरता या ऑस्टियोपोरोसिस के प्रमुख लक्षण हैं।

कारण :- रजोनिवृत्ति होना,दीर्घकालिक रोगों से ग्रस्त होना,लम्बे समय तक ग्लुकोकार्टिकॉइड दवाओं का प्रयोग,कैल्सियम रहित खाद्य पदार्थों का सेवन,आनुवांशिक कारण,सेक्स हार्मोन का कम होना,अबटु ग्रंथि की अकर्मण्यता,विटामिन डी की कमी,धूम्रपान अधिक करना,कुपोषण,शारीरिक निष्क्रियता,गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ऑपरेशन आदि अस्थिसुषिरता या ऑस्टियोपोरोसिस के मुख्य कारण हैं।

उपचार :- (1) 10 ग्राम अशोक वृक्ष की छल को 400 ग्राम पानी में डालकर धीमी आंच पर उबालें और जब 100 के लगभग शेष रह जाये तब 

                    छानकर सुबह - शाम पीने से अस्थिसुषिरता या ऑस्टयोपोरोसिस ठीक हो जाता है।

(2) भाजी एवं हरी सब्जियां विशेषकर पालक,शलजम,सरसों का साग,ब्रोकली धनिया,पत्तागोभी,हरी फलियां,मशरूम,लेट्यूस आदि का प्रतिदिन सेवन करने से अस्थिसुषिरता या ऑस्टियोपोरोसिस ठीक हो जाता है।

(3) प्रतिदिन आहार में तुलसी,पुदीना,सोंफ के बीज,दालचीनी,लहसुन,अजवाइन,रोजबेरी,अजमोद आदि के सेवन से भी अस्थिसुषिरता में बहुत लाभ मिलता है।

(4) वसा युक्त मछली,लिवर,अंडे,संतरे,बादाम,तिल के तेल का सेवन अस्थिसुषिरता को दूर कर देता है।

(5) दूध,दही,पनीर,डेयरी उत्पाद को अपने दैनिक आहार में शामिल कर भी अस्थिसुषिरता या ऑस्टियोपोरोसिस से बचे रह सकते हैं।

(6) अश्वगंधा,शतावर,सुरंजान,सोंठ सबको समान मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर प्रतिदिन सुबह - शाम ताजे जल से सेवन करने से अस्थिसुषिरता या ऑस्टियोपोरोसिस से मुक्ति पा सकते हैं।

(7) अश्वगंधा,हल्दी,मेथी,सोंठ समान भाग लेकर चूर्ण बनाकर सुबह - शाम सेवन करने से अस्थिसुषिरता दूर हो जाता है।

(8) एक किलो चूना को पानी में भिगों दें और उसमें साबुत हल्दी डालकर दो महीने डूबा रहने दें और बीच - बीच में पानी देते रहे जिससे सूखे नहीं।उसके बाद निकालकर उसेअच्छी तरह से धो कर साफ कर सूखाकर चूर्ण बनाकर रख लें और सुबह - शाम आधा या एक चम्मच ताजे जल या दूध के साथ सेवन करने से जीवन में अस्थिसुषिरता रोग से बचे रहेंगे।यह बिलकुल रामबाण और निरापद है।


osteoclast disease

ऑस्टियोक्लास्ट विकार रोग :- ऑस्टियोक्लास्ट विकार हड्डियों का एक अत्यंत घातक रोग है,जिसमें ऑस्टियोक्लास्ट अस्थि कोशिकाएँ हड्डी के ऊतकों को विखंडित कर हड्डियों की सतत मरम्मत एवं रखरखाव और उनके पुनर्निर्माण के कार्यों को नहीं कर पाती है। इसके साथ कैल्सियम की मात्रा को नियंत्रित करने में असमर्थ होती है,जो इनका महत्त्वपूर्ण कार्य है।वास्तव में मूल रूप से ऑस्टियोक्लास्ट कोशिकाओं का कार्य अम्ल स्रावित कर हड्डियों के जलीकृत प्रोटीनों एवं खनिजों को आणविक स्तर पर तोड़कर उन्हें पुनः हड्डियों का मरम्मत करने का कार्य होता है।यही कोशिकाएँ दूध के दाँतों की जड़ों को कमजोर कर उनकी जगह नए दाँतों को स्थायी रूप देने का कार्य करती करती है।इसे पगेट के नाम से भी जाना जाता है।

लक्षण :- शरीर के हड्डियों में दर्द,हड्डी खोखला हो जाना,अचानक हड्डियों का टूट जाना,विशेष प्रकार का सिरदर्द,हड्डियों में विकृति आ जाना,सिर के आकर में वृद्धि,चेहरे में विकृति,मानसिक विकार,मनोभ्रंश के लक्षण,सुनाई कम देना,चक्कर आना,दाँतों का ढीलापन,मूत्र का असंयमित होना,आदि ऑस्टियोक्लास्ट के प्रमुख लक्षण है।

कारण :- ओस्टोयोक्लास्ट कोशिकाओं का कार्य अस्थि ऊतक को गलाने का होने के कारण,कैल्सियम का पिघले लगना,धूम्रपान करना खासकर सिगरेट पीना,शराब का अत्यधिक सेवन करना,आनुवंशिक कारण,घातक हड्डी का कैंसर,ऑस्टियोक्लास्ट से पीड़ित पशुओं का मांस भक्षण से,कीटनाशकों से आर्सेनिक के प्रयोग के कारणआदि ऑस्टियोक्लास्ट के मुख्य कारण हैं।

उपचार :- (1) हल्दी,दारू हल्दी,अम्बा हल्दी सबको समान भाग लेकर चूर्ण बनाकर प्रतिदिन आधा चम्मच रात में 

                   सोते समय गुनगुने दूध के साथ करने से ऑस्टियोक्लास्ट विकार रोग ठीक हो जाता है।

              (2) एलोवेरा जेल या जूस का प्रतिदिन सेवन करने से ऑस्टियोक्लास्ट विकार रोग ठीक हो जाता है।

              (3) अश्वगंधा पाउडर का प्रतिदिन गुनगुने दूध के साथ सेवन करने से ऑस्टियोक्लास्ट विकार रोग ठीक  

                    हो जाता है।

              (4) पालक को उबालकर पीने से भी ऑस्टियोक्लास्ट में बहुत आराम मिलता है।

              (5) आंवला चूर्ण प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से ऑस्टियोक्लास्ट विकार में बहुत आराम मिलता है।


knee pain


घुटने का दर्द :- मानव शरीर में पैर एक महत्त्वपूर्ण अंग है ।घुटना पैरों के बीच में स्थित होता है,जो पैरों को मुड़ने की क्षमता प्रदान करता है ।घुटने या उसके आसपास दर्द,घुटने के जोड़ का दर्द बहुत ही कष्टदायक होता है।मनुष्य चलने-फिरने,उठने-बैठने में असमर्थ रहता है।घुटनों का दर्द किसी बीमारी के आलावा दूसरी वजहों से भी हो सकता है ।घुटने पर पैर की हड्डियों को जोड़ने वाले रेशेदार ऊतक का खिंचाव,लिगमेंट का फटना,किसी चोट,मांसपेशियों का फटना आदि कारणों से होता है

लक्षण :- घुटने में दर्द होना,चलने या उठने-बैठने में दर्द होना,देर तक खड़ा नहीं रह पाना,मांशपेशियों में दर्द,पैर मोड़ने में दर्द आदि घुटने के दर्द के प्रमुख लक्षण हैं ।

कारण :- ऑस्टियोआर्थराइटिस,गाउट ऊतक विकार,घुटने पर बार-बार दबाव पड़ने से,सीढ़ियां चढ़ने या चढाव पर चढ़ने और उतरने,घिसा हुआ कार्टिलेज,घिसा हुआ लिगमेंट,झटका लगने,मोच होने,जोड़ का संक्रमण,घुटने की चोट,नीकैप का विस्थापन,मोटापा आदि घुटने के दर्द के मुख्य कारण हैं ।

उपचार :-  (1)मेथी के बीज को लेकर उबाल लें और उसमें नीम्बू एवं शहद मिलाकर चाय की तरह प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से घुटने


                   का दर्द दूर हो जाता है ।

              (2) सेंधा नमक (मैग्नीशियम सल्फेट) पानी में डालकर गुनगुना कर लें और दर्द से पीड़ित अंग को उसमें डुबो कर कुछ देर रखने से

                    घुटने का दर्द ठीक हो जाता है

              (3) जैतून तेल की मालिश से भी घुटने का दर्द ठीक हो जाता है

              (4) हल्दी पाउडर में सरसों तेल एवं थोड़ा सा नमक मिलाकर लेप करने से भी घुटने का दर्द समाप्त हो जाता है

              (5) सरसों तेल में अजवाइन,हल्दी पाउडर,लहसुन की पांच-छह कलियाँ डालकर जलाएं और गुनगुना हो जाने पर मालिश करने से

                   भी घुटने का दर्द ठीक हो जाता है ।

 


waist pain disease

 

कमर दर्द रोग :- मनुष्य की कमर मांसपेशियों,स्नायुबंधन,नसों,डिस्क और अस्थियों की एक जटिल संरचना से बनी है।इन सब में से किसी  के साथ होने वाली समस्या से कमर दर्द हो सकता है ।वास्तव में कमर दर्द मनुष्य की शारीरिक समस्याओं में अत्यंत गंभीर विषय है ।कमर दर्द लम्बे समय से घंटों तक बैठे रहने की जीवन शैली,धूम्रपान,शराब का सेवन एवं सोने -जागने का नियमित समय होना,आयु और लिंग,शरीर का भारीपन,बहुत अधिक शारीरिक परिश्रम करने आदि के कारण हो सकता है ।ऑफिस में घंटों गलत पॉश्चर में बैठे रहना और व्यायाम करने की वजह से कमर का दर्द आजकल केवल उम्र से जुड़ी है ;बल्कि इससे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी भी काफी तकलीफदेह साबित हो रही है ।कमर का दर्द अत्यंत कष्टकारी और असहज करने वाला होता है ;किन्तु आमतौर पर यह कोई गंभीर बीमारी नहीं होता है।

लक्षण :- कमर में दर्द,खिंचाव या अकड़न होना,शरीर में दर्द,सिर में दर्द,चलने -फिरने या मुड़ने में असहजता,खड़े रहने में परेशानी,वजन घटना,मल-मूत्र विसर्जन में कठिनाई,जननांगों में सुन्नपन,बुखार आदि कमर दर्द के प्रमुख लक्षण हैं ।

कारण :- हर दिन की गतिविधियाँ के गलत तरीके,घंटों एक ही पॉश्चर में बैठे रहना,भरी सामान को खींचना या उठाना,गलत रारीके से उठाना,लम्बे समय तक खड़े रहना,गिरने या चोट लगने के कारण,मेरुदंड में विकार के कारण,धूम्रपान,अत्यधिक शराब का सेवन,ज्यादा सोने,व्यायाम न करने के कारण,मानसिक तनाव,कमर की नसों में विकार,प्रसव के कारण,मांसपेशियों में खिंचाव या ऐठन,डिस्क का विच्छेदन,डिस्क में उभार,कटिस्नायु  शूल,साइटिका,गठिया,रीढ़ का टेढ़ापन,आस्टियोपोरोसिस,कब्ज,रीढ़ की हड्डी का कैंसर,नींद सम्बन्धी विकार,दाद,ख़राब गट्टे आदि कमर दर्द के मुख्य कारण हैं ।

उपचार :- (1) जैतून तेल की मालिश से कमर दर्द ठीक हो जाता है

              (2) सरसों तेल  में हल्दी,अजवाइन,लौंग एवं लहसुन की पांच -छह कलियों को जलाकर और उस तेल की मालिश से कमर दर्द

                    ठीक हो जाता है

              (3) दूध में हल्दी,दारू हल्दी एवं अम्बा हल्दी पाउडर को मिलाकर और उसे थोड़ा गुनगुनाकर पीने से कमर दर्द दूर हो जाता है

              (4) टिल के तेल से कमर की मालिश से कमर दर्द दूर हो जाता है

              (5) एरंड के तेल की मात्रा आधा चम्मच दूध में मिलाकर पीने से भी कमर दर्द दूर हो जाता है ।

 


arthritis disease

गठिया रोग :- गठिया रोग एक अत्यंत गंभीर एवं कष्टप्रदाक रोग है।आयुर्वेद में इसे वात रक्त रोग के नाम से जाना जाता है। इस रोग में प्यूरिन नामक प्रोटीन के मेटाबोलिज्म की विकृति का परिणाम है।गठिया रोग में यूरिक एसिड की अधिकता हो जाने से संधि शोथ एवं संधियों में सोडियम वायींयूरेट के जमा होने के विशेष लक्षण दिखाई पड़ते हैं,जो अधिकांश हाथ,पैर,अँगुलियों और सभी जोड़ों में दृष्टिगोचर होता है।यह रोग महिलाओं से ज्यादा पुरुषों को होता है।यह कई प्रकार होते हैं -एक्यूट,आस्टियो,रूमेटाइट,गाउट आदि।

लक्षण :- जोड़ों में सूजन आना,पैरों के अंगूठे में सूजन,हाथ -पैरों के जोड़ों में तेज दर्द होना,जोड़ों के आसपास लाल होना,प्रभावित हिस्से को हिलाने में परेशानी,जकड़न,आदि गठिया रोग के प्रमुख लक्षण हैं।

कारण :- यूरिक एसिड का जमा होना,वजन बढ़ जाना,मीनोपॉज के बाद,आनुवंशिक कारण,उम्र का ज्यादा होना,शराब का ज्यादा सेवन,किडनी का ठीक से काम न करना,उच्च रक्त चाप,पोषण की कमी,आयरन एवं कैल्सियम की अधिकता आदि गठिया रोग के मुख्य कारण हैं।

उपचार :- (1) जैतून के तेल का भोजन में शामिल करने से गठिया के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है।

              (2) अदरक स्वरस का प्रयोग प्रतिदिन काला नमक मिलकर सेवन करने से भी गठिया रोग दूर हो जाता है।

              (3) बीटा क्रिप्टोक्सेंथिन युक्त खाद्य पदार्थों (गाजर)के सेवन से गठिया रोग से मुक्त हो सकते हैं।

              (4) वातरक्तांतक रस,गिलोय स्वरस एवं शहद के सेवन से गठिया रोग दूर हो जाता है।

              (5) चेरी,ब्लैकबेरी,स्ट्राबेरी,अंगूर,बैगन आदि खाद्य पदार्थों के सेवन से भी गठिया रोग दूर हो जाता है।

              (6) डेयरी उत्पादों,संतरे का रस,सोया दूध एवं अनाज विटामिन डी की कमी को पूरा करते हैं और गठिया रोग का नाश करता है।

              (7) ओमेगा -3 फैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थों ( पुराने जौ,गेहूं,अनाज एवं अखरोट) के सेवन से गठिया रोग का दूर हो जाता है।

              (8) ब्रोकली,हरी फूलगोभी के नियमित प्रयोग से गठिया की बीमारी दूर हो जाती है।

              (9) सूखे अदरक का पाउडर 6 ग्राम बनाकर उसमें 6 ग्राम जीरा पाउडर एवं 3 ग्राम काली मिर्च मिलाकर आधा चम्मच ताजे जल के 

                    साथ सेवन करने से गठिया रोग दूर हो जाता है।

              (10) अदरक का तेल प्रभावित हिस्से पर लगाने से गठिया रोग दूर हो जाता है।

              (11) कपूर में लहसुन का रस मिलाकर लगाने से भी गठिया रोग दूर हो जाता है। 

              (12) एक -दो चम्मच मछली का तेल प्रतिदिन खाने से भी गठिया रोग दूर हो जाता है।

              (13) मेथी पाउडर एक चम्मच ताजे जल के साथ सेवन करने से गठिया रोग दूर हो जाता है।

              (14) हल्दी पाउडर गुनगुने दूध में मिलाकर पीने से गठिया रोग दूर हो जाता है।

              (15) नीम के तेल में प्याज का रस मिलाकर मालिश करने से भी गठिया रोग दूर हो जाता है। 

              (16) दालचीनी पाउडर में शहद मिलाकर लगाने से गठिया रोग दूर हो जाता है। 


  बच्चों के रोग

  पुरुषों के रोग

  स्त्री रोग

  पाचन तंत्र

  त्वचा के रोग

  श्वसन तंत्र के रोग

  ज्वर या बुखार

  मानसिक रोग

  कान,नाक एवं गला रोग

  सिर के रोग

  तंत्रिका रोग

  मोटापा रोग

  बालों के रोग

  जोड़ एवं हड्डी रोग

  रक्त रोग

  मांसपेशियों का रोग

  संक्रामक रोग

  नसों या वेन्स के रोग

  एलर्जी रोग

  मुँह ,दांत के रोग

  मूत्र तंत्र के रोग

  ह्रदय रोग

  आँखों के रोग

  यौन जनित रोग

  गुर्दा रोग

  आँतों के रोग

  लिवर के रोग